Saturday, 2 June 2018

चित्रा नक्षत्र : इस नक्षत्र के देव त्वाशतव और स्वामी मंगल है | इस नक्षत्र के जातक शौकीन मिजाज होते हैं | अनेक विषयों में शौक होने के कारण किसी एक विषय में ध्यान केंद्रित नही कर पाते हैं | घुमने-फ़िरने, कपड़ा, नाटक, सिनेमा और खाने-पीने का शौक होता है | ये बहुत चंचल होते हैं | इनसे सफ़लता की आशा कर सकते है पर ये ज्यादा मानसिक मेहनत नही करना चाहते है |

स्वाति नक्षत्र : इस नक्षत्र के देव वायु और स्वामी राहु है | इस राशि के जातकों में एकाग्रता और सफ़ल होने के गुण पाए जाते हैं | ये अपना लक्ष्य निर्धारित करकेही आगे बढ़ते है | तुला राशि के सारे गुण इस नक्षत्र के जातकों में पाए जाते हैं | ये भाग्यवान होते हैं |

विशाखा नक्षत्र : इस नक्षत्र के देव इन्द्र-अग्नि है और स्वामी गुरु है | तुला राशि और इस नक्षत्रमें जन्म लेने वाले जातकों में सफ़लता कम पायी जाती है | ये हमेशा मुश्किलों में घिरे रहते हैं | ये कम शौकीन होते हैं | इनके मन में हमेशा विरोधाभाषी विचार चलते रहते हैं अत: ये दुविधा में रहते हैं | शारीरिक सुख की इच्छा में भी दुविधा में रहते है अत: लाभ नही उठा पाते हैं |
स्व‍ाति का अर्थ झुंड में अग्रणी बकरी और दूसरा अर्थ पुरोहिती या पुजारी। वैदिक ज्योतिष के अनुसार स्वाति नक्षत्र के सभी चार चरण तुला राशि में स्थित होते हैं जिसके कारण इस नक्षत्र पर तुला राशि तथा इस राशि के स्वामी ग्रह शुक्र का भी प्रभाव पड़ता है।

* प्रतीक चिह्न : अंकुर या कोंपल
* रंग : काला
* अक्षर : र, ल
* वृक्ष : अर्जुन का पेड़
* नक्षत्र स्वामी : राहुल
* राशि स्वामी : शुक्र
* देवता : वायु और सरस्वती
* शारीरिक गठन : स्वाति नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति का डीलडोल भारी होता है। रंग गोरा और रूपवान होता है। पेट की बीमारी से ग्रस्त रह सकता है।

भौतिक सुख : भाग्यशाली होने के कारण भूमि और भवन का सुख, स्त्री सुख पूर्ण।

सकारात्मक पक्ष : स्वाति नक्षत्र में जन्म होने से जातक चतुर, लोकप्रिय, सुशील, व्यापारी, कृपालु, मधुर भाषी तथा देवताओं और ब्राह्मणों का भक्त होता है। इसके अलावा अतीन्द्रिय संवेदी, अंतर्ज्ञानी और धर्मशास्त्र के उस्ताद होते हैं।

नकारात्मक पक्ष : अधिकार के लिए ये बिलकुल सहिष्णु नहीं होते हैं। अड़ियल और घमंडी होने के कारण ये दूसरों की उन्नति से जलते रहेंगे। यदि इनमें सेक्स के प्रति अति उत्सुकता रही तो भाग्य साथ देना छोड़ देगा। शुक्र के खराब होने की स्थिति में भौतिक और स्त्री सुख जाता रहेगा। संगी-साथियों का प्रेमी, मदिरा आदि नशीली वस्तुओं का उपभोगी होता है।



Next
This is the most recent post.
Previous
Older Post

0 comments:

Post a Comment